"भारत का स्वतंत्रता संग्राम (1857 से 1947) – सम्पूर्ण इतिहास, नोट्स एवं महत्वपूर्ण तथ्य"
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भारत का स्वतंत्रता संग्राम (1857 से 1947 तक) – सम्पूर्ण नोट्स
प्रस्तावना
भारत का स्वतंत्रता संग्राम एक लंबा और कठिन संघर्ष था, जिसने लगभग 90 वर्षों तक ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीयों को एकजुट रखा। इस आंदोलन ने भारतीयों को राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से जागरूक किया और अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता दिलाई।
यह नोट्स प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग तथा अन्य सभी सरकारी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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1. 1857 की क्रांति – प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
पृष्ठभूमि / कारण
राजनीतिक कारण: अंग्रेजों की “Doctrine of Lapse” नीति, कई रियासतों का विलय।
आर्थिक कारण: भारी कर, कारीगरों व किसानों का शोषण, उद्योगों का विनाश।
सामाजिक कारण: सती प्रथा पर प्रतिबंध, विधवा पुनर्विवाह कानून – जिसे भारतीय समाज ने बाहरी हस्तक्षेप माना।
धार्मिक कारण: अंग्रेजों पर धर्म परिवर्तन कराने का संदेह।
सैन्य कारण: भारतीय सैनिकों के साथ भेदभाव और नई एनफील्ड राइफल की कारतूस में चर्बी का प्रयोग।
क्रांति की शुरुआत और फैलाव
10 मई 1857 को मेरठ से क्रांति की शुरुआत हुई।
दिल्ली में बहादुर शाह जफर को क्रांतिकारियों ने सम्राट घोषित किया।
प्रमुख केंद्र: कानपुर (नाना साहेब), झाँसी (रानी लक्ष्मीबाई), बिहार (कुँवर सिंह), अवध (बेगम हजरत महल)।
परिणाम
क्रांति असफल रही लेकिन इसने अंग्रेजों को हिला दिया।
1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हुआ और सत्ता सीधे ब्रिटिश सरकार के हाथों में चली गई।
भारत में गवर्नर जनरल का पद बदलकर वायसराय कर दिया गया।
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2. कांग्रेस की स्थापना और प्रारंभिक चरण (1885 – 1905)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में ए.ओ. ह्यूम द्वारा की गई।
पहले अध्यक्ष – डब्ल्यू.सी. बनर्जी।
इस काल को “नरमपंथी युग” कहा गया।
प्रमुख नेता – दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता।
मांगें – अधिक भारतीयों की नियुक्ति, विधान परिषद का विस्तार, करों में राहत।
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3. गरम दल और स्वदेशी आंदोलन (1905 – 1919)
1905 में बंगाल विभाजन (लॉर्ड कर्ज़न द्वारा) हुआ।
इसके विरोध में स्वदेशी आंदोलन और बहिष्कार आंदोलन शुरू हुआ।
प्रमुख नेता – बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल (लाल-बाल-पाल)।
1907 में कांग्रेस दो भागों में बंट गई – नरम दल और गरम दल।
1916 में लखनऊ समझौता (कांग्रेस और मुस्लिम लीग का समझौता)।
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4. गाँधी युग (1919 – 1947)
(क) असहयोग आंदोलन (1920–22)
पृष्ठभूमि: जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919), रॉलेट एक्ट।
गांधी जी ने असहयोग आंदोलन का नेतृत्व किया।
लोगों ने सरकारी स्कूल, नौकरी, अदालतों का बहिष्कार किया।
आंदोलन अचानक चौरी-चौरा कांड (1922) के बाद बंद कर दिया गया।
(ख) सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–34)
गांधी जी ने नमक सत्याग्रह (दांडी मार्च, 1930) से इसकी शुरुआत की।
जनता ने अंग्रेजी कानूनों का पालन करने से इनकार किया।
1931 में गांधी-इरविन समझौता हुआ।
(ग) भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
द्वितीय विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश सरकार ने भारत से सहयोग मांगा लेकिन भारतीय नेताओं ने स्वतंत्रता की मांग रखी।
9 अगस्त 1942 को बंबई में “भारत छोड़ो” आंदोलन का नारा दिया गया।
पूरे देश में जन आंदोलन फैल गया।
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5. क्रांतिकारी आंदोलन
भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव – लाहौर षड्यंत्र केस।
चंद्रशेखर आज़ाद – हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस – आज़ाद हिंद फौज की स्थापना।
इन आंदोलनों ने युवाओं को बलिदान और आज़ादी के लिए प्रेरित किया।
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6. स्वतंत्रता के अंतिम चरण
1946 में कैबिनेट मिशन योजना आई।
1947 में माउंटबेटन योजना के अनुसार भारत का विभाजन हुआ।
15 अगस्त 1947 – भारत स्वतंत्र हुआ और पाकिस्तान अलग राष्ट्र बना।
स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने जवाहरलाल नेहरू और पहले गवर्नर जनरल बने लॉर्ड माउंटबेटन (फिर सी. राजगोपालाचारी)।
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7. स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख व्यक्तित्व
महात्मा गांधी – अहिंसा और सत्याग्रह के प्रवर्तक।
सुभाष चंद्र बोस – “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।”
भगत सिंह – “इंकलाब ज़िंदाबाद”।
सरदार पटेल – लौह पुरुष, स्वतंत्रता के बाद रियासतों का विलय।
डॉ. भीमराव अंबेडकर – संविधान निर्माता।
जवाहरलाल नेहरू – स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री।
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निष्कर्ष
भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल राजनीतिक आंदोलन नहीं था, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जागृति का भी प्रतीक था। यह संघर्ष हमें यह सिखाता है कि एकजुट होकर और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

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